अंकन रु० .... की वसूली का वाद जिस पर रु० .... न्याय शुल्क देय है
(Suit for recovery of Rs...... court fees affixed thereon Rs. .........)
न्यायालय
(सामान्य मूल दीवानी क्षेत्राधिकार)
वाद संख्या ............ सन्
ABC (एक निगम निकाय बैंकिंग-कम्पनीज (एक्वीजीशन एण्ड ट्रान्सफर आफ अन्डर टेकिंगस एक्ट, 1970 के अन्तर्गत निगमित और संगठित-जिसका पंजीकृत कार्यालय ............ पर है)
अ०ब०स० ............ वादी
बनाम
स०द० फ० ............ प्रतिवादी
अंकन रू० ............ का वाद
अंकन रु० ............ कोर्ट फीस अदा की गई
श्रीमान जी,
उपरोक्त वादी निम्न प्रकार सविनय निवेदन करता है :
- यह कि वादी एक निगम निकाय है जो कि बैंकिंग कम्पनीज (एकवीजीशन एण्ड ट्रांस्फर आफ अन्डरटेलिंगस एक्ट, 1970 के अन्तर्गत निगमित और संगठित है। जिसका पंजीकृत कार्यालय ............. पर स्थित है जिस की शाखा का कार्यालय ............ नई दिल्ली-110003 पर स्थित है। जिसका मुख्य अधिकारी और संवैधानिक प्रतिनिधि भी ............. है और इस प्रकार वह वतमान वाद की परिस्थितियों एवं तथ्यों से पूर्णतया अवगत है। वादी द्वारा श्री ............. को बाजारव मुखत्यासामा वाद पत्र पर हस्ताक्षर करने और सत्यापन करने तथा प्रार्थना-पत्र देने, शपथपत्र दायर करने, वाद दायर करने, अधिवक्ता को लगाने और इसके सम्बन्ध में अन्य सभी कार्य करन अधिकृत किया गया है। तदनुसार ही वाद पत्र श्री ............ द्वारा सत्यापित किया गया है न्यायालय में दायर किया गया है।
- यह कि प्रतिवादी नंबर 1 एक प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी है जो कम्पनीज आचा अन्तर्गत विधिवत निगमित है जिसका पंजीकृत कार्यालय ............. पर तथा शाखाका ............ पर स्थित है। प्रतिवादी नंबर 2 और 3 प्रतिवादी नंबर 1 के क्रमश: प्रबन्ध निदर निदेशक हैं और उनके द्वारा व्यक्तिगत रूप से प्रतिवादी नंबर 1 को स्वीकृत ऋण सुविधा दी गई है।
- यह कि प्रतिवादी नंबर 1 द्वारा वर्ष ............ में एक नग ............ कम्प्यूटर उपसाधनो सहित ............ से विलंबित भुगतान के आधार पर क्रय किया गया था। आगे संक्षिप्त ............. कहा जायेगा। इसलिए प्रतिवादी उक्त कंप्यूटर क्रय करने हेतु वादी के पास इस क साथ पहँचा कि वह देशीय मद्दति हण्डी को स्वीकार करले जो कि प्रतिवादा नबर क नाम में अंकन रु०............की भूगतान योग्य होगी। वादी द्वारा प्रतिवादी की इस प्रार्थना उदारतापूर्वक विचार किया गया और प्रतिवादी नंबर 1 द्वारा जारी हुण्डी को स्वीकार कर लिया गया और तदनुसार देशीय मुद्दति हुण्डी स्वीकार करने की सुविधा विलंबित भुगतान योजना के आधार पर प्रतिवादी नंबर 1 की ओर से वादी के हित में स्वीकृत कर दी गई।
- यह कि उपरोक्त विलंबित भुगतान आश्वासन योजना के अंतर्गत देशीय मुद्दति हुण्डी स्वीकार करने की सुविधा को जारी रखने के उद्देश्य से प्रतिवादी नंबर 2 और 3 द्वारा बोर्ड के दिनांक ............ के प्रस्ताव के अन्तर्गत प्रतिवादी नं0 1 की ओर से निम्नांकित प्रतिभूति दस्तावेजों पर वादी के हित में हस्ताक्षर कर निष्पादन किया गया और उसी तारीख में वादी को हस्तगत किया गया।
- काउण्टर गारन्टी और इंडेमानिटी का अनुबन्ध दिनांक ............
- ठोस चल सम्पत्ति के रूप में प्लान्ट एण्ड मशीनरी के गिरवी रखने का अनुबन्ध ।
- अधिकार पत्र और प्रतिप्राप्य पत्र दिनांक............
- प्रतिवादी नं० 1 के खाते में नाम में प्रविष्टि करने के वास्ते बट्टे खाते का अधिकार पत्र दिनांक............
- किसी प्रकार का कमीशन/गारन्टी प्राप्त न करने का प्रतिज्ञा पत्र दिनांक ...........
- वादी की सहमति के बिना अन्य किसी कम्पनी में धन न लगाने अथवा कोई खर्च ना करने, डिविडेन्ट घोषित करने अथवा भुगतान ना करने का प्रतिज्ञा पत्र दिनांक ..
- घोषणा पत्र दिनांक ......
- अग्रिम धनराशि को केवल कम्प्यूटर के क्रय करने में ही व्यय करने का घोषणा पत्र दिनांक......
- यह कि प्रतिवादी नंबर 1 वादी बैंक के साथ इस बात पर भी सहमत हो गया था कि प्रत्येक हुण्डी के परिपक्व होने से कम से कम ............ दिन पूर्व पर्याप्त धनराशि उपलब्ध करायेगा ताकि वादी द्वारा हुण्डी की परिपक्वता तिथि पर 1 CIM को भुगतान कर सके और ऐसा ना करने में असफल रहने में प्रतिवादी नं0 1@ 7.50% O.B.R.PA. ब्याज अदा करने हेतु भी सहमत हो गया था जो कि न्यूनतम 17.50% वार्षिक तिमाही आधार पर 2% दण्डनीय ब्याज सहित कालातीत धनराशि पर देय था अथवा ऐसी दरों पर जो कि वादी द्वारा प्रतिवादी को समय समय पर सूचित की गई हो जो कि ऐसी हुण्डी के भुगतान की तिथि व वादी द्वारा ICIM को करने से प्रतिवादी द्वारा पुन: भुगतान करने तक होगा।
- यह कि जैसा कि प्रतिवादी नंबर 2 और 3 द्वारा प्रस्तुतीकरण और सहमति द्वारा प्रतिवादी नं० 1 की ओर वाजिब धनराशि जो कि देशीय मुद्दति हुण्डी स्वीकार सुविधा के अन्तर्गत ली गई थी के भुगतान का आश्वासन दिया गया है और पृथक-पृथक और सम्मलित रूप से स्टाम्प पर लिखा गया है, व्यक्तिगत और जारी रहने वाला दस्तावेज वादी के हित में दिनांक ............. को लिखा गया था जिसके आधार पर प्रतिवादी नं0 1 की ओर वाजिब देय धन राशि को वादी द्वारा लिखित में माँग करने के दो दिन बाद खाते में जमा कराया जाना था।
- यह कि प्रतिभति से सम्बन्धित बहुत से दस्तावेजों के निष्पादन और अनुसरण के तहत वादी द्वारा प्रतिवादी नं० 1 द्वारा 10 देशीय मुद्दति हुण्डियाँ स्वीकार की गई जिनकी कुल धनराशि रु० ... होती है जो विभिन्न तिथियों में भुगतान हेतु देय हो चुकी हैं जिनका भुगतान सम्बन्धित तिथि को किये जाने का अनुदेश भी है जिनका विवरण निम्न प्रकार है ।............ संलग्न पृष्ठांकित हुण्डियाँ (वाद में संक्षिप्त इस प्रकार).....
- यह कि प्रतिवादी नंबर 1 द्वारा प्रतिभूति दस्तावेजों की स्वीकृति प्राप्त अनेकों शर्तों की अवहेलना की गई और बैंकिंग वित्तीय अनुशासन को बनाये रखने में विफल रहा और प्रत्येक हण्डि के परिपक्व होने की तिथि से सात दिन पूर्व पर्याप्त धन राशि जमा नहीं की गई ताकि उक्त हुण्डी की धन राशि का ब्याज सहित ............ को भुगतान किया जा सकता । चूँकि प्रतिवादी नं0 1 द्वारा प्रत्येक हण्डी की परिपक्वता तिथि से पूर्व वादी को पर्याप्त धनराशि अदा करने में विफल रहा और असावधानी बरती गई है सभी हुण्डियों का भुगतान वादी द्वारा उनकी परिपक्वता तिथि पर सम्बन्धित बैकों द्वारा प्रस्तुत किये जाने पर किया गया।
- यह कि प्रतिवादियों द्वारा स्वीकारोक्ति और पुष्टि करने का पत्र दिनांक ..... हस्ताक्षरित करके देशीय मुद्दति हण्डी स्वीकार सुविधा की पुष्टि की गई और अंकन रु०....... की सीमा तक स्वीकारोक्ति की गई इसके बावजूद कि अन्य बहुत से प्रतिभूति के दस्तावेज भी उनके द्वारा भरे गये हैं।
- यह कि प्रत्येक अवसर पर वादी द्वारा प्रतिवादी नंबर 1 से देय धन राशि के भुगतान करने का अनुरोध देशीय मुद्दति हुण्डी स्वीकार सुविधा योजना के तहत किया गया परन्तु प्रतिवादी द्वारा वादी के अनुरोध की ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया, परिणामस्वरूप काफी भारी धन राशि एकत्रित हो गई। वादी के काफी अनुरोध और पीछा करने पर प्रतिवादी द्वारा अंकन रु० ............ का भुगतान विभिन्न तिथियों में, अंतिम दिनांक ............ को केवल प्रथम पाँच हण्डियों से सम्बन्धित आंशिक ब्याज और कमीशन भुगतान किया गया जैसा कि उपरोक्त पैरा 7 में विवरण दिया गया। प्रतिवादियों द्वारा शेष बिलों के सम्बन्ध में ब्याज, कमीशन और अन्य चार्जेज के रूप में कोई भुगतान नहीं किया गया।
- यह कि वादी द्वारा बारंबार प्रतिवादियों से यह अनुरोध किया गया कि वे अपनी बकाया धन राशि का शीघ्र भुगतान करे परन्तु प्रतिवादियों द्वारा वादी के इन अनरोधों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। चूँकि प्रतिवादी द्वारा भुगतान करने में असावधानी बरती गई और वे विफल रहे तो वादा द्वारा अपने अधिवक्ता श्री ............ द्वारा प्रतिवादियों पर काननी नोटिस दिनांक ............ तामाल कराया गया जिसमें अंकन रु० ............ की माँग रु० 17.50% वार्षिक त्रय मासिक विराम कर में दिनांक ............से भुगतान की तिथि तक नोटिस तामील होने से सात दिन के भीतर भुगता करने को कहा गया परन्तु प्रतिवादियों द्वारा नोटिस तामील हो जाने के बावजूद वादी को काइ गुण नहीं किया गया इसीलिए यह वाद दायर किया गया है।
- यह कि प्रतिवादियों द्वारा ठोस सचल प्लान्ट और मशीनरी के गिरवी रखने का । ............. को अनुबन्ध लिखकर ............ कम्प्यूटर को भी फैक्ट्री में लगी हुई अन्य मशीनरी को भी और फालतू पड़ी हई मशीनरी को भी गिरवी रख दिया गया था और नई दिल्ला का में अथवा माल मार्ग में अथवा अन्य किसी स्थान पर गिरवी रखने के दस्तावेज की शता क वादी को पूर्ण अधिकार और शक्ति प्राप्त है कि वह उन्हें जब्त करे, वसूली करे रिसीवर का कराये अथवा हटाये अथवा पब्लिक नीलामी द्वारा विक्रय करे अथवा निजी ठेके पर पर कम्प्यूटर को दे और प्लान्ट और मशीनरी को भी दे दे यदि प्रतिवादियों द्वारा भुगतान में काई रखी जाती है। चँकि प्रतिवादियों द्वारा बैंकिंग वित्तीय अनुशासन को बनाये रखने म असार बरती गई है और वे विफल रहे हैं और उनके द्वारा अपने देययों की अदायगी नहीं की गई तो वादी को पूर्ण अधिकार है कि वह गिरवी रखी गई वस्तुओं को विक्रय कर दे ताकि प्रतिवादियों से उनकी ओर देय की उचित प्रकार से वसूली की जा सके।
प्रतिवादियों की ओर बकाया
13. यह कि दिनांक............को निम्न धनराशि बकाया है।
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S.No.
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Bill No.
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दिनांक
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धन राशि
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कमीशन और ब्याज सहित देय धनराशि
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जो कि प्रतिवादी नंबर 1 से 3 तक मुख्य ऋणदाता और गारेन्टर होने के कारण सम्मिलित रूप से तथा पृथक-पृथक भुगतान के लिए वादी का उत्तरदायी है जो कि भविष्यकालीन और वादकालीन ब्याज के लिए भी उत्तरदायी हैं।
14. यह कि वर्तमान वाद को दायर करने का वाद हेतुक (cause of action) प्रथम बार वादी के हित में और प्रतिवादियों के विरुद्ध दिनांक ............ को तब उत्पन्न हुआ जब प्रतिवादीगण द्वारा देशीय विलंबित हण्डी स्वीकार सुविधा योजना को स्वीकार और अमल करने की गर्ज से बहुत से प्रतिभूति पत्र वादी के हित में निष्पादित किये गये। इसके उपरान्त यह दिनांक ............ को तब उत्पन्न हुआ जब वादी द्वारा देशीय विलंबित हुण्डियाँ जो कि प्रतिवादी नं0 1 द्वारा निर्गत की गई थी, और जो वादी के हित में थी। इसके उपरान्त यह तब उत्पन्न हुआ जब उन सभी अवसरों पर जब प्रतिवादीगण परिपक्वता से पूर्व हुण्डियों का भुगतान करने में विफल रहे और उनका भुगतान उनकी सम्बन्धित परिपक्वता तिथि को वादी द्वारा किया गया। यह उन सब अवसरों पर भी उत्पन्न हुआ जब वादी द्वारा प्रतिवादियों से भुगतान करने का अनुरोध किया गया और प्रतिवादीगण भुगतान करने में विफल रहे अंतिम रूप से यह दिनांक ............ को तब उत्पन्न हुआ जब वादी द्वारा वैधानिक माँग नोटिस प्रतिवादी पर तामील किया गया और बावजूद वादी द्वारा नोटिस प्राप्त करने के भुगतान करने में असावधानी बरती गई और विफल रहे । वाद हेतू अभी भी जारी है और विद्यमान है ।
15. यह कि मान्य न्यायालय को इस वाद को सुनने का आर्थिक और सीमा सम्बन्धित क्षेत्राधिकार प्राप्त है चूँकि सभी पक्षकारों का कार्यालय और लाभ कार्य देहली में ही है जो कि न्यायालय की सीमा में आता है और वाद हेतु देहली में भी उत्पन्न हुआ है।
16. यह कि न्याय शल्क के उद्देश्य हेतु वाद का मूल्य और आर्थिक क्षेत्राधिकार हेत् रु० .... है और तदनुसार न्याय शुल्क अंकन रु० ............ का भुगतान किया गया है।
प्रार्थना
इसीलिए सविनय प्रार्थना है कि मान्य न्यायालय निम्न प्रकार कृपा करने का कष्ट करे –
(क) अंकन रु० ............ की डिक्री सम्मलित और पृथक पृथक वादकालीन और भविष्य कालीन ब्याज 19.5% वार्षिक की दर से त्रयमासिक गणना के आधार पर डिक्री के इजराय होने तक प्रतिवादीगणों के विरुद्ध और वादी के हित में पारित करें।
(ख) गिरवी रखे सामान ............ और अन्य मशीनरी और खुला सामान जो कि
.....पर पड़ा हुआ है को विक्रय करने का आदेश पारित किया जाये और उससे प्राप्त बिक्री धन को डिक्री की धनराशि में समायोजित किये जाने का आदेश पारित किया जाये।
(ग) कुल वाद खर्च दिलाया जाये।
(घ) कोई अन्य आदेश जो यह मान्य न्यायालय उचित समझे भी वादी के हित में और प्रतिवादी गणों के विरुद्ध पारित किया जाये।
स्थान ............ दिनांक...... वादी.......
द्वारा वैद्यानिक आटर्नि .....
द्वारा अधिवक्ता.........
सत्यापन
मैं कि श्री ............. वादी का वैधानिक प्रतिनिधि यह सत्यापित करता हूँ कि पैरा 1 से 13 उपरोक्त वाद पत्र में मेरी जानकारी में सत्य हैं और वादी बैंक के रिकार्ड से उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर हैं और पेरा 14 से 16 तक कानूनी सलाह के आधार पर मेरे विश्वास में सत्य हे आर अंतिम पैरा इस न्यायालय से प्रार्थना है। सत्यापित-
स्थान ............ दिनांक ............ सन् ............
वादी......
द्वारा अधिकृत आटर्नि ...